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"जै कारा नेताजी का" .......बोल......?

Posted On: 30 Jul, 2011 में

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राजनीति चाणक्य सी ,
लोक हीत में होय ,
जन-जन का कल्याण करे ,
नीति कहावै सोय !
नीति कहावै सोय ,
आज उलटी है गंगा ,
कल का नेता छोड़ ,
आज का नेता नंगा !
नहीं तवज्जो उम्र को ,
अनुभव दरकिनार ,
काबिज़ सत्ता में वही ,
जो ज्यादा मक्कार !
जो ज्यादा मक्कार ,
वही है असली नेता ,
जिसे कुर्सी-सत्ता के सिवाय ,
कुछ नहीं दिखाई देता !
सत्ता पा इसको मिली ,
मनमानी की छूट ,
जैसे कद का नेता है ,
वैसी उसकी लूट !
जनता जाये भाड़ में ,
हो देश का बंटाधार ,
चाहे कुछ भी हो रहे ,
पर बनी रहे सरकार !
निष्ठा इनकी दोगली ,
जैसी इनकी जात ,
चाहे जो सरकार हो ,
निष्ठा उसके साथ !
नैतिकता अब रही नहीं ,
नेताओ के पास ,
सत्ता ही की होड़ है ,
बाकी सब बकवास !
बाकी सब बकवास ,
खो गए मुद्दे सारे ,
संसद पर काबिज़ हुए ,
चोर ,गुंडे, हत्यारे !
शर्म नहीं है नाम को ,
इतने ये बेशर्म ,
सत्ता पाने को करें ,
कुत्तों जैसा कर्म !,
कुत्तों जैसा कर्म ,
गुर्राएँ ,दांत-दिखाएँ ,
पा हड्डी कुर्सी की ,
फिर ये पूँछ हिलाएं !

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

alkargupta1 के द्वारा
July 31, 2011

वर्तमान राजनेताओं का यथार्थपरक चित्रण बहुत ही बढ़िया रचना !

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    समर्थन के लिए आभार, अलका जी !

Nikhil के द्वारा
July 31, 2011

आदरणीय राजू जी, मेरी रचना पर आपकी प्रतिक्रिया ने आपकी व्यंग्यात्मक शैली का परिचय कराया था. आपकी इस रचना को पढ़ कर बड़ा मज़ा आया. समसामयिक राजनीति की सच्चाइयों को उजागर करती एक सुन्दर रचना.

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    हौसला अफजाई का शुक्रिया निखिल जी !

Santosh Kumar के द्वारा
July 31, 2011

नेताओं की सच्चाई का रोचक वर्णन ,.. सादर धन्यवाद

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आभार ,संतोष जी !

anamika के द्वारा
July 31, 2011

सच ओ खोल कर रख दिया आपने…….बढ़िया

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    काश: की यह सच देश के लोग समझ पाते,तो ये दिन नहीं देखने पड़ते ! प्रतिक्रिया के लिए आभार, अनामिका जी !

nishamittal के द्वारा
July 30, 2011

नेतासमुदाय की कोई विशेषता आपने नहीं छोडी ,बधाई

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    निशा जी , ये सर्वगुण संपन्न लोग हैं !ये जितने ज़मीन के ऊपर दिखते हैं उससे कई गुना ज़मीन के भीतर होते हैं !इनकी विशेषताओ का वर्णन सूर्य को दीपक दिखाने के समान है ! प्रतिक्रिया के लिए आभार !

shaktisingh के द्वारा
July 30, 2011

कविता के माध्यम से शासन तंत्र की व्याख्या बहुत ही रोचक है.

    rajuahuja के द्वारा
    July 31, 2011

    आभार शक्ति जी !


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