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दिल की गहराइयों से

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आओ बाबा बाबा खेलें ..!

Posted On: 7 Jun, 2012 Others में

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आज आस्था के नाम पर,धर्म की आड़ में ऐसा घिनोना खेल खेला जा रहा है,जो हमारी सांस्कृतिक मान्यताओं- परम्पराओं में घुन के सामान है ! इन तथाकथित स्वयं-भू साधू/बाबा/माँ जैसों ने इन शब्दों की मर्यादा को अपमानित किया है !
जहाँ तक हिन्दू धर्म का प्रश्न है ,इसकी कोई निश्चित रुपरेखा नहीं !इसके कई पहलू हैं ,जिसने जैसा चाहा वैसा ही मान लिया !साधारण अर्थ में निश्चित रूप से इसकी परिभाषा दे सकना अत्यंत कठिन है !यह सत्य को सर्वोपरि मानने वाला धर्म है !इसके मतानुसार सत्य ही ईश्वर है !विज्ञानं ईश्वर से तो इन्कार कर सकता है लेकिन सत्य को नहीं नकार सकता !और यह धर्म सत्य को ही ईश्वर मानता है ! आस्तिक तो ठीक लेकिन यहाँ नास्तिक के लिए भी स्थान है !और इसी बात का फायदा ये तथाकथित लोग उठा रहे हैं !
आधुनिक जीवनशैली ने विलासिता के साथ साथ अंतहीन प्रतिस्पर्धा भी दी है ! परिणाम-स्वरुप नैतिक पतन तो हुआ ही ,इच्छाओ ,आकांशाओं की विफलता से दुखी लोग शार्ट-कट के चक्कर में इन तथाकथित बाबाओं के मायाजाल में फस जाते हैं ! यह बात सर्वथा समझ से परे है की आज का शिक्षित वर्ग भी कैसे उस परमात्मा को भूल जाता है जिसने सारी कायनात की रचना की है ! ये ढोंगी किसी और का नहीं वरन सिर्फ अपना भला करते हैं !

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
June 7, 2012

राज जी आज बहुत दिन पश्चात आपके साईट पर दर्शन हुए.ये बाबा ही धर्म के स्वरूप को विकृत करते हैं.

    rajuahuja के द्वारा
    June 7, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद् निशा जी ! ईश्वर से कामना करता हूँ की आपका स्नेह सदैव यूँ ही मिलता रहे !..प्रणाम !

dineshaastik के द्वारा
June 7, 2012

आदरणीय राजू जी अब तो बाबागिरि एक  जोब  की तरह लगने लगा है। आज  यह सबसे लाभ  का व्यवसाय  बन गया  है। दूसरे नम्बर पर राजनीति….सटीक  प्रस्तुति के लिये  बधाई……. http://dineshaastik.jagranjunction.com/ मृत्यु के पूर्व और मृ्त्यु के बाद

    rajuahuja के द्वारा
    June 7, 2012

    धन्यवाद् दिनेश जी ! हमारी संस्कृति में धर्म और शिक्षा को जीवन दर्शन के रूप में देखा जाता रहा है ! आज शिक्षा का पूर्ण रूप से व्यवसाई करण हो चुका है ! विडम्बना यह की अब धर्म को भी व्यवसाय का बहुत बड़ा माध्यम बनाया जा रहा है ! हजारों करोड़ का टर्न-ओवर है इन तथाकथित बाबाओं का ! विलासिता के वो सारे संसाधन उपलब्ध हैं इनके पास जिसकी आम आदमी कल्पना भी नहीकर सकता ! ” धर्म का मार्ग कठिन है ” आज ऐसा नहीं है ! समय ने सारी व्याख्याएं बदल दी हैं !


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