आह्वान

दिल की गहराइयों से

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मन की बात .............!

Posted On: 26 Jun, 2012 में

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मन की बात ,
मन को ही कहने दो !
कर्तव्यों की वेदी पर ,
थके पग ,
त्यक्त पाते हो ,
स्वयं को !
राग-द्वेष-भेद,
कर दरकिनार ,
आत्मभव !
मन को मनस्थ रहने दो ,
मन की बात ,
मन को ही कहने दो !

स्वप्न ,
कब होते साकार ?
कर्म को बना ,
पतवार !
जीवन की नैया को ,
धारा में बहने दो !
मन की बात ,
मन को ही कहने दो !

शुन्य से आना ,
शुन्य में जाना ,
दिख रहा जो कुछ ,
सारा बेगाना !
झूठी अभिलाषा ,
भ्रम क्षितिज सा ,
चपल अचिर मन,
अपरीछन्न रहने दो !
मन की बात ,
मन को ही कहने दो !

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 13, 2012

शुन्य से आना , शुन्य में जाना , दिख रहा जो कुछ , सारा बेगाना ! झूठी अभिलाषा , भ्रम क्षितिज सा , प्रिय आहूजा जी बहुत खूबसूरत रचना गहन भाव लिए ..इस को जो गहराई से समझ लिया फिर विनाश में न लग प्रेम में खो जाएगा ..बधाई भ्रमर ५

    rajuahuja के द्वारा
    July 14, 2012

    आपका तहे-दिल से स्वागत है भ्रमर जी ,साधुवाद !

jlsingh के द्वारा
July 10, 2012

आदरणीय आहूजा जी, सादर अभिवादन! विभिन्न ब्लोग्स पर आपकी पर्तिक्रिया पढ़ते पढ़ते आज आपके ब्लॉग पर पहुंचा …. मन की बात मन में ही क्यों रहने दो! कर्म को बना,पतवार ! जीवन की नैया को , सही दिशा में जाने दो ! थोडा सा परिवर्तन निराशा के भाव मिटाने के लिए. आप बहुत ही सटीक प्रातक्रिया देते हैं. कभी मेरे ब्लॉग पर भी आइये …. सादर!

    jlsingh के द्वारा
    July 10, 2012

    प्रातक्रिया को ‘प्रतिक्रिया’ पढ़ें! टंकण अशुद्धि!

    rajuahuja के द्वारा
    July 10, 2012

    हौसला अफजाई का तहे दिल से शुक्रिया jlsingh साहब !

nishamittal के द्वारा
July 5, 2012

मंच से अनुपस्थित रहने के कारण आपकी रचना देरी से पढ़ सकी.बहुत अच्छा आह्वान कर्म को बना , पतवार ! जीवन की नैया को , धारा में बहने दो !

    rajuahuja के द्वारा
    July 8, 2012

    आपका स्वागत है निशा जी !

Punita Jain के द्वारा
June 30, 2012

-राग-द्वेष-भेद, कर दरकिनार , आत्मभव ! मन को मनस्थ रहने दो , मन की बात , मन को ही कहने दो ! -बहुत सुन्दर पंक्तियाँ |

    rajuahuja के द्वारा
    June 30, 2012

    aapka swagat hai Punita ji .

yogi sarswat के द्वारा
June 29, 2012

शुन्य से आना , शुन्य में जाना , दिख रहा जो कुछ , सारा बेगाना ! झूठी अभिलाषा , भ्रम क्षितिज सा , चपल अचिर मन, अपरीछन्न रहने दो ! मन की बात , मन को ही कहने दो ! सुन्दर भाव लिए , खूबसूरत शब्दों से सजी एक बेहतरीन रचना !

    rajuahuja के द्वारा
    June 29, 2012

    आभार ! आपका स्वागत है योगी जी !

yamunapathak के द्वारा
June 27, 2012

कर्म को बना , पतवार ! जीवन की नैया को , धारा में बहने दो ! सबसे सुन्दर सन्देश आहूजाजी हम सभी के लिए प्रेरक शुक्रिया सर

    rajuahuja के द्वारा
    June 27, 2012

    ब्लाग में स्वागत है यमुना जी ! हौसला अफजाई का शुक्रिया !

dineshaastik के द्वारा
June 27, 2012

स्वप्न , कब होते साकार ? कर्म को बना , पतवार ! जीवन की नैया को , धारा में बहने दो ! मन की बात , मन को ही कहने दो ! राजू जी बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण अभिव्यक्ति….

    rajuahuja के द्वारा
    June 27, 2012

    बहुत धन्यवाद् दिनेश जी !आशा है आपका स्नेह सदैव मिलता रहेगा !


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