आह्वान

दिल की गहराइयों से

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क्या सचमुच हम .......??

Posted On: 14 Aug, 2012 में

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c01है बुझा-बुझा सा दिल ,बोझ सांस-सांस पर ,
जी रहे हैं फिर भी हम ,सिर्फ कल की आस पर !

z11xxxxवो सुबह कभी तो आएगी ……..!

c02जिस देश का बचपन भूखा हो ,
फिर उसकी जवानी क्या होगी ?

c 04aकौन आएगा इधर ,किसकी राह देखें हम ,
जिसकी आहटें सुनी जाने किसके थे कदम !

z5दुनियां बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई ,
काहे को दुनियां बनायी …?

z6जाएँ तो जाएँ कहाँ ….?

z10समझेगा कौन यहाँ …..?

z 2दर्द भरे दिल की जुबां !

z 3हर रूह में एक गम छुपा लगे है ,
ये ज़िंदगी तो कोई बददुआ लगे है !

z7जाऊ कहाँ बता ऐ दिल ,दुनियां बड़ी संगदिल !

c04bकोई होता जिसको अपना ,हम अपना कह लेते यारों …!

z8ये जीवन है ,इस जीवन का ,यही है रंगरूप !

farmer 01अल्लाह मेघ दे ,पानी दे छाया दे !

poor frmrबना के क्यों बिगाड़ा रे नसीबा उपर वाले !

poor frmr 1ये क्या किया रे दुनियां वाले ,जहाँ के सभी गम तुमने मुझको दे डाले !

c0xxमाँ मुझे अपने आँचल में छुपा ले ,गले से लगा ले की और मेरा कोई नहीं !
भूखा नंगा बचपन , न पेट को रोटी , न तन को कपड़ा, सर के छप्पर से मरहूम ! कैसी आज़ादी …? किसकी आज़ादी……??

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
August 17, 2012

राजुभाई ईस में जो भिखारी है उसे भारत के नागरिक नही समजा जाता है । उन के पास घर नही है तो राशन कार्डवाली पहेचान नही है । पहेचान नही तो वोटर लिस्ट में नाम नही है । तो वो सरकारी खुराक (वोटर) नही है । ईन का भला क्यों करे । हां, एक रास्ता है । सरकार के कान में कोइ फुंक मारे की बंगला देसियों की तर्ज पर ईन को भी जोपडी और राशन कार्ड दे दो और ईन को अपना बना लो वोटर बना कर । आप को ही वोट देंगे । दुसरे जो गरीब है वो पहले से सरकारी खुराक है । और सरकार को कच्चा चबाने का ही शौक है । ईन का विकास कर के ईन को पकाना अकलमंदी नही है । पक जाने पर वोट कीसे दे दे भरोसा नही । जे.जे के पके हुए आदमियों का कोइ भरोसा कर सकता है ?

    rajuahuja के द्वारा
    August 18, 2012

    धन्यवाद् भरोदिया जी !

Mohinder Kumar के द्वारा
August 16, 2012

आहुजा जी, नमस्कार दिल को छूने वाले अमर गीतों की पंक्तियों के साथ मर्म भेदी चित्र. परिवर्त्न हमारे ही हाथ है…आईये एक कडी बनाये और कुछ कर दिखाये.

    rajuahuja के द्वारा
    August 17, 2012

    मोहिंदर जी आपका स्वागत है ! शायद भविष्य के परिवर्तन की आशा दिल में संजोये, आज लोकतंत्र की लाश अपने कन्धों पर ढ़ोने को विवश है आदमी ! किसी शायर की जुबानी ……….. जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं , और क्या कसूर है पता ही नहीं ! इतने हिस्सों बँट गया हूँ मैं , मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं !

jlsingh के द्वारा
August 16, 2012

हर गांव में बिजली होगी, हर घर अब रौशन होगा मोबाइल के साथ (न रोटी) इन्टरनेट फैशन होगा.

    rajuahuja के द्वारा
    August 17, 2012

    माननीय jlsingh साहब आपका स्वागत है ! यह मोबाइल का खेल भी भूखों के गाल पर तमाचा है, कितना कमीशन बंटेंगा कोई अंदाज़ा नहीं ! हद है बेशर्मी की !

vasudev tripathi के द्वारा
August 15, 2012

आहूजा जी, एक चित्र हजार शब्दों से अधिक बोलता है.. भारत की वेदना में चीखते चित्रों का अच्छा संकलन साथ ही साथ सटीक caption …!

    rajuahuja के द्वारा
    August 15, 2012

    त्रिपाठी जी, यह तो कुछ भी नहीं, वास्तविकता रोंगटे खड़े कर देती है !

yamunapathak के द्वारा
August 15, 2012

आदरणीय आहूजा जी प्रत्येक तस्वीर का caption बहुत झकझोरने वाला है है.

    rajuahuja के द्वारा
    August 15, 2012

    माननीया यमुना जी,भूख/बेबसी/दुःख/कुंठा/ के समक्ष प्रत्येक caption गौण है !

dineshaastik के द्वारा
August 15, 2012

आदरणीय राजू जी, सादर नमस्कार। मेरा मानना है कि यह आधी अधूरी आजादी थी, यदि सच कहा जाये तो काँग्रेस और अंग्रेजों के मध्य सत्ता हस्तान्तरण का एक समझौता था। फिर भी आधी अधूरी आजादी की मुबारकबाद……

    rajuahuja के द्वारा
    August 15, 2012

    धन्यवाद् दिनेश जी , आपका स्वागत है !


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